ससुराल के व्यंग्यबाण | कहानी - 8


हाय राम ,कमर के जोड़ ने तो उठना, बैठना ,लेटना ही मुहाल कर दिया है। अरे बहू जरा कड़वा तेल में दो जवा लहसुन और अजवाइन डाल गर्म करला मेरी कमर और जोड़ जोड़ में असहनीय पीड़ा है आज सासूमाँ ने अपने कमरे से ही आवाज दी। इधर बहू राधा अपने सारे काम निपटा कर कमरे को चारों तरफ से बंद कर टिकटॉक बना रही थी। उसे सुनाई भी ना दिया कि सासूमाँ उसे घण्टो से पुकार रही।टिकटॉक बनाने में मस्त राधा ये भूल चुकी थी कि घर पर सबके जाने के बाद तो सासूमाँ घर पर ही रहती हैं।

राधा की अभी नयी नयी ही शादी हुई थी । पति के ऑफिस जाने के बाद वो खुद को अकेला महसूस करती इसीलिए उसने टिकटॉक पर एक आईडी बना ली और डेली पांच वीडियो बना कर डाल ही देती। टिकटॉक का भूत राधा को कुछ यूं चढ़ रहा था कि वो किचन में भी शुरू हो जाती या घर के सारे कार्य से जब भी खाली होती वो घर के अन्य कामो को अनदेखा कर सबसे ज्यादा जरूरी टिकटॉक बनाती।

सासूमाँ को ये जरा भी ना भाता की आखिर बहू सबके जाने के बाद उन्हें इतना अनसुना क्यों कर देती है। कहराते हुए वो किसी तरह बहू के कमरे तक आई और जब वो कमरे के नजदीक पहुँची तो उन्हें अंदर से गानों की तेज आवाज आ रही थी। पहले तो उन्हें बहुत ही तेज गुस्सा आया लेकिन सासूमाँ ने भी आज ठान ही लिया कि पहले देखेंगी की आखिर अंदर हो क्या रहा है। सासूमाँ ने देखा बहू बेटे की शर्ट पहन फोन के आगे बाल बिखरे अजीब गरीबो तरह से नाच रही है। ये देखते ही उन्हें गुस्सा आया कि आखिर ये क्या अभद्रता है। आने दो बेटे को तब सब साफ हो जाएगा कि आखिर उसके जाते इस घर मे क्या होता है। 

 सासूमाँ बड़बड़ाती हुई बोली मेरी तो इस घर मे कोई कदर ना है। आजकल की बहुएं बस पति की ही होती है। वो भी क्या पता होती भी है कि नही। यहां दर्द से रहा नही जा रहा वहाँ महारानी अभद्र कपड़े पहन झूम रही राम राम राम!हे प्रभु कैसी बहू पाले डाल दिए हमारे। 

शाम को बेटे के आते ही सासूमाँ ने बेटे को पूरी बात बताई बेटा मुस्कुराया और बोला तुम सास बहू ना अपना मेटर खुद ही सॉल्व कर लिया ना करो माँ । इतना थक कर आओ एक तरफ तुम्हारी शिकायत की पोटली, दूसरे ओर उसके शिकायत की पोटली। वाह बेटा वाह!यहाँ माँ कलझ रही तेरी बीवी अध कपड़ों में बाल बिखरे फोन के आगे ना जाने किसके आगे नाच रही तुझे फ़र्क ही नही पड़ता। अरे मेरा क्या है एक दिन मैं कलझ कर मर जाऊंगी तुम दोनों की मुसीबत टल जाएगी। माँ क्यों हर दम यही बोलना आज ही पूछुंगा ऐसा क्यों करती हो माँ के साथ। 

आज उसने राधा से पूछ ही लिया कि आखिर मेरे जाने के बाद तुम माँ का खयाल क्यों नही रखती। बडी डांट के बाद राधा ने अपने पति को बताया कि वह रोज घर का पूरा काम करने के बाद टिकटॉक पर वीडियोस बनाया करती है। जिससे उसका मन थोड़ा बहल जाता है। राधा के पति ने उसे समझाया तुम माँ के साथ घुलो मिलो माँ को भी इन सब चीजों से अवगत कराओ तो वो भी तुम्हे समझेगी साथ ही तुम दोनों का ही समय कट जाएगा। लेकिन सासूमाँ को कहा फोन पर जुटे रहना पसंद आने वाला। बेटे के जाते वो बहू पर चीड़ चीड़ करती। यह बहू को रास ना आता और हुआ एक दिन कुछ ऐसा जो घर घर मे हो ही जाता है,बहू ने सारी हदें पार कर दी,यह देख सासूमाँ को लगा बात तो हाथ से निकल रहा और दोनों में जमकर तू तू मैं मैं झगड़ा हो ही गया।

जब शाम को बेटा घर लौटा तो घर का माहौल रोज की अपेक्षा अलग था, राधा पतिदेव को देखते रोने लगी। पति देव ने पूरी बात जाननी चाही और अंत मे राधा को ही डांट दिया की माँ सही तो कह रही हे तुम फ़ोन पे दिन भर क्या करती हो।अगर तुम्हें इतना अकेला महसूस होता है तो माँ को क्यों नही हो सकता।

मैं इस बुढ़िया माँ से क्या बात करूं तुम्ही बताओ राधा ने जवाब दिया। इतना सुनते पतिदेव ने राधा का फोन हाथ से छीन लिया और उसके मोबाइल की पड़ताल करने जुट गया।उसने देखा राधा ने विभिन्न तरीको से खूब सारे टिकटॉक पर वीडियोस बना रखे है।उनमें से काफी अच्छे थे, तो काफी पर्सनल जो कि सभी पब्लिक पर थे और उनमें से कुछ वायरल भी हो रहे थे। कुछ लोग डुएट बना रहे थे। ये सब देखते ही पतिदेव को गुस्सा आया और राधा का फोन छीन कर खुद के पास रख लिया।उसे प्यार से समझाया देखो राधा तुम एक बहू पहले हो फिर टिकटॉक की साथी। माँ को भी तुम्हारी जरूरत है,इतने सालों उन्होंने अच्छी बहू पाने के लिए तपस्या किया और तुम उन्हें इस कदर अनदेखा कर दोगी तो वो जीते जी मर जाएगी। राधा को आज पतिदेव की बात समझ आ गयी। उसने सभी कामो की तरह ही टिकटॉक का भी एक समय बांधा और सासूमाँ का भी ध्यान रखने लगी,अब तो सासूमाँ भी सबसे खुश होकर बताती "हमारी बहू टिकटॉक बनाती है; तुम्हारी बनाती हैं क्या" ?

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तुम्हरी माँ ऐसी। तुम्हारी माँ वैसी। ...................................................................................................................................................................................................................................हा है बुरी मेरी माँ!बहुत बुरी...जिसने अंधेरी ठंड की घनघोर कुहासे वाली रात अपने बच्चों को लेकर रोती रही घर के दरवाजे पे। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने खुद अन्न जल ग्रहण न किया मगर अपने बच्चों को दूध न सही पानी पिला के बड़ा किया। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने खुद की जिंदगी और तमाम छोटी बड़ी खुशियों को दफना अपने बच्चों को बड़ा किया। हॉ है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने आँखों की रोशनी अपने बच्चों की जीवन मे रोशनी लाने के लिए गवा दिए।                         हा है बुरी मेरी माँ...जिसने कभी दुःख का दुखड़ा न रोया,बल्कि दुसरो के दुख को समझा। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने शौख अरमानों को बंद बक्से में कैद कर दिया। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने बच्चों में किसी चीज की कमी न की।  हा है बुरी मेरी माँ....जिसने दिन भर स्कूलों में पढ़ा...शाम को ट्यूशन पढ़ाते हुए घर की कमान संभाली। हा हा है बुरी मेरी माँ....जिसने लू के थपेड़े में शास्त्री ब्रिज पैदल पार किया।  हा है बुरी मेरी माँ...जो आज भी अपने बच्चों के लिए जान न्यौछावर कर रही। हा हा है बुरी मेरी माँ...जो घुट घुट कर रोती है।                    हा है बुरी मेरी माँ ....जिसने ठंडी हवाओं में वही स्वेटर से सालो गुजार दिए..बच्चों को कभी किसी चीज की कमी न की। हा है बुरी मेरी माँ....जिसने तमाम ठोकर खाने के बावजूद उन तमाम रिस्तेदारों के फिजूली अपशब्द सुनने के बाद उन्हें आज भी प्रेम स्नेह से सम्मान करती है,उनके आने की खुशी पर क्या से क्या न कर दे उसके लिए हैरत में रहती है।  हा है बुरी मेरी माँ...जो तीन सौ रुपए में अपने बच्चों का पालन पोषण कर उनके ख्वाहिश ख्वाब को संजोती है। हा है बुरी मेरी माँ ....जो आज भी तमाम कष्टो से जूझते हुए उफ्फ तक नही करती। हा हा है बुरी मेरी माँ ...क्योंकि उसने सब सह लिया...।                हा है बुरी मेरी माँ..क्योंकि आज उसने अपने बच्चों को अपनी आँखों की रोशनी बना खुद की निगाहें कमजोर कर दी। हा है बुरी मेरी माँ....जिसने कभी किसी से शिकवा शिकायत नही की। हा है बुरी मेरी माँ...शायद बहुत बुरी जो खुद बीमार है मगर खुद को कहती है "मैं बिल्कुल ठीक हूँ"।                           हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने बच्चों को न खाने में कमी की न रहन सहन में। हा है बुरी मेरी माँ....जो खुद कभी खुल कर रो न सकी।हा हा है बुरी मेरी माँ....जो अपने बच्चों को सबके आगे डॉट लगाती है।              हा है बुरी मेरी माँ...जिसने एक बेटी,एक पत्नी,एक माँ होने का फर्ज ही नही अदा किया बल्कि ...अपनी नन्ही परियो को जिंदगी के मायने ओर उसके इम्तिहान से जीतने का हौसला ओर डर का डट कर सामना करना सिखाया। मुझे गर्व है इस बुरी माँ पर...जिसने अपनी कोख से समझदार नन्ही परियो को जन्म दिया।गर्व है अपनी माँ पर...❤️