चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है

चलों एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है
पुरानी तस्वीरे इंस्टा फेसबुक पर साझा कर लिया करते हैं
भले ही दिल मे सम्मान कम हो
भले ही दिल मे सम्मान कम हो
मगर कुछ तो लिखना है मदर्स डे पर
इसीलिए एक तस्वीर साझा कर लिया करते है
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते हैं
माँ जब भी किसी बात को कहती है हम खिसियाके कहते है
ओफ्फफोह, यार कितना चुल करती हो
अभी तो फोन उठाया था कि हर समय फोन फ़ोन करती हो
औररो की माँ से कुछ सीखो
औररो के माँ से कुछ सीखो
कैसे वो उफ़्फ़फ़ भी नही करती
एक तुम हो कि हर समय जीना हराम कर देती हो
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते हैं

जब वो कहती है उठ जा सुबह हो गयी
तब तुम कहते हो अभी तो सोया था
वो कहती नालायक रात भर क्या करते हो
हम खिसियाके के कहते मम्मी यार तुम ना जमाने के साथ चलो
काहे को ये हमारे पीछे पड़ी रहती हो
वो हक जता कर कहती
वो हक जता कर कहती
बच्चे हो तुम मेरे अपने ,
इसीलिए खयाल रखती हूं
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते हैं
जब जब ये मातृत्वदिवस आता है
तुम पोस्ट क्या करना है कितने व्यूज लाने है
उसकी तैयारी करते हो
कभी तो ,
कभी तो इन झूठे वक़्त से बाहर निकलो
माँ के साथ वक़्त जाया करो
माँ का प्यार झूठा नही
माँ का प्यार झूठा नही
वो तो अटूट प्रेम करती है
लाख कर लो माँ की बुराई या बेइज्जती
वो सब भूलकर अपनाती है
कभी तो
कभी तो तुम भी माँ को अपनाया करो
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते हैं।
बीवी आने पर तुम बात बात पर माँ पे रौब जमाते हो
अरे पगले वो तो माँ है
तेरी हर हरक्क्त को बचकाना समझ लेती है
पिता के जाने के बाद उसका कौन बचता है
पिता के जाने के बाद उसका कौन बचता है
ये सोच सोच ही वह रुंध जाती हैं
कभी सोचा है कि ये ख्याल क्यो आते है उसके जहन में
तुम्हारे होते हुए
कभी सोचा है कि ये ख्याल क्यो आते है उसके जहन में
पति भले चला गया बेटी तो अभी बाकी है
जिसके पैदा होने पर वो नाज किया करती थीं
आज वो खुद को इतना असहाय क्यों समझती है
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है
जब छोड़कर दुनिया से चली जाती है माँ
तब तब तुम माँ माँ कह कर पिघल उठते हो
जब वक़्त था माँ के साथ जीने का
तब तब तुम बरस पड़ते थे
जब उसे जरूरत थी तब तब तुम झिड़क दिया करते थे
जब जब जरूरत थी तुम्हे उसके अंचल में लिपट लिया करते थे
जब जरूरत थी उसे तब तुम समय ना रहने का बहाना किया करते थे
भले ही घण्टो बाबू सोना से बात किया करते थे
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है
चलो एक बार फिर माँ को याद कर लिया करते है।

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तुम्हरी माँ ऐसी। तुम्हारी माँ वैसी। ...................................................................................................................................................................................................................................हा है बुरी मेरी माँ!बहुत बुरी...जिसने अंधेरी ठंड की घनघोर कुहासे वाली रात अपने बच्चों को लेकर रोती रही घर के दरवाजे पे। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने खुद अन्न जल ग्रहण न किया मगर अपने बच्चों को दूध न सही पानी पिला के बड़ा किया। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने खुद की जिंदगी और तमाम छोटी बड़ी खुशियों को दफना अपने बच्चों को बड़ा किया। हॉ है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने आँखों की रोशनी अपने बच्चों की जीवन मे रोशनी लाने के लिए गवा दिए।                         हा है बुरी मेरी माँ...जिसने कभी दुःख का दुखड़ा न रोया,बल्कि दुसरो के दुख को समझा। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने शौख अरमानों को बंद बक्से में कैद कर दिया। हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने बच्चों में किसी चीज की कमी न की।  हा है बुरी मेरी माँ....जिसने दिन भर स्कूलों में पढ़ा...शाम को ट्यूशन पढ़ाते हुए घर की कमान संभाली। हा हा है बुरी मेरी माँ....जिसने लू के थपेड़े में शास्त्री ब्रिज पैदल पार किया।  हा है बुरी मेरी माँ...जो आज भी अपने बच्चों के लिए जान न्यौछावर कर रही। हा हा है बुरी मेरी माँ...जो घुट घुट कर रोती है।                    हा है बुरी मेरी माँ ....जिसने ठंडी हवाओं में वही स्वेटर से सालो गुजार दिए..बच्चों को कभी किसी चीज की कमी न की। हा है बुरी मेरी माँ....जिसने तमाम ठोकर खाने के बावजूद उन तमाम रिस्तेदारों के फिजूली अपशब्द सुनने के बाद उन्हें आज भी प्रेम स्नेह से सम्मान करती है,उनके आने की खुशी पर क्या से क्या न कर दे उसके लिए हैरत में रहती है।  हा है बुरी मेरी माँ...जो तीन सौ रुपए में अपने बच्चों का पालन पोषण कर उनके ख्वाहिश ख्वाब को संजोती है। हा है बुरी मेरी माँ ....जो आज भी तमाम कष्टो से जूझते हुए उफ्फ तक नही करती। हा हा है बुरी मेरी माँ ...क्योंकि उसने सब सह लिया...।                हा है बुरी मेरी माँ..क्योंकि आज उसने अपने बच्चों को अपनी आँखों की रोशनी बना खुद की निगाहें कमजोर कर दी। हा है बुरी मेरी माँ....जिसने कभी किसी से शिकवा शिकायत नही की। हा है बुरी मेरी माँ...शायद बहुत बुरी जो खुद बीमार है मगर खुद को कहती है "मैं बिल्कुल ठीक हूँ"।                           हा है बुरी मेरी माँ...जिसने अपने बच्चों को न खाने में कमी की न रहन सहन में। हा है बुरी मेरी माँ....जो खुद कभी खुल कर रो न सकी।हा हा है बुरी मेरी माँ....जो अपने बच्चों को सबके आगे डॉट लगाती है।              हा है बुरी मेरी माँ...जिसने एक बेटी,एक पत्नी,एक माँ होने का फर्ज ही नही अदा किया बल्कि ...अपनी नन्ही परियो को जिंदगी के मायने ओर उसके इम्तिहान से जीतने का हौसला ओर डर का डट कर सामना करना सिखाया। मुझे गर्व है इस बुरी माँ पर...जिसने अपनी कोख से समझदार नन्ही परियो को जन्म दिया।गर्व है अपनी माँ पर...❤️